Sunday, May 25, 2014

उनके साथ ही ऐसा क्यों किया गया ?



16 मई को जब पूरा देश लोकसभा चुनावो के नतीजे देखने में मस्त था उसी समय हमारी सुप्रीम कोर्ट एक फैसला सुना रही थी.. सुप्रीम कोर्ट ने  Altaf Malek , Adambhai Ajmeri, Mohammed Salim Hanif Sheikh, Abdul Qaiyum Muftisaab Mohmed Bhai, Abdullamiya Yasinmiya, और Chand Khan को अक्षरधाम मंदिर पर हमले के मामले में बाइज़्ज़त बरी किया और इन निर्दोष लोगो को फसाने के लिए गुजरात पुलिस और राज्य के गृह मंत्रालय को लताड़ भी लगायी.. जब कोई मुस्लिम किसी आतंकवादी घटना के लिए गिरफ्तार किया जाता है तो मीडिया चिल्लाने लगती है कि देखोआतंकवादी गिरफ्तार, आतंकवादी गिरफ्तार’ और साथ ही पुलिस और जाँच एजेंसियों की तारीफों के पुल भी बांध दिए जाते है ... अक्षरधाम मंदिर पर हुए आतंकी हमले में भी यही हुआ, मामले की जाँच हुई कुछ लोग गिरफ्तार हुए... स्पेशल कोर्ट (POTA ) ने उन लोगो को सजा भी सुनाई, हाई कोर्ट ने उनकी सजा को कन्फर्म भी किया फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पंहुचा.. सुप्रीम कोर्ट ने सभी की सजा को निरस्त कर दिया है , उन सभी को इनोसेंट बताया है.. लेकिन सवाल ये है की क्या उन छह लोगो को केवल बरी कर देने से उनकी जिंदगी का वो एक एक पल उन्हें वापस मिल जायेगा जो उन्होंने जेल या पुलिसिया प्रताड़ना के बीच गुजारी है ? क्या ये मीडिया, पुलिस, सरकार और न्यायपालिका उन लोगो के परिवार वालो को हुई उस मानसिक प्रताड़ना का हिसाब देंगे जो उन्होंने पिछले ग्यारह सालो में एक आतंकवादी के परिवार के सदस्य होने के नाते सही है? और सवाल ये भी है कि उनके साथ ही ऐसा क्यों किया गया ? अपने 281 पेज के जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट इन सवालो के जवाब देने की हिम्मत नहीं दिखा पायी लेकिन पता नहीं मुझे ऐसा क्यों लगता है कि वो अगर मुसलमान होते तो शायद उनके साथ ऐसा होता !